The Tribes of Chhattisgarh | छत्तीसगढ़ की जनजातियााँ (PDF)
‘छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ’, नीतू निशा द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो छत्तीसगढ़ की जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत, संस्कृति, सामाजिक जीवन, आर्थिक व्यवस्था, परंपराओं और विविधता को समझने में सहायक है। इस पुस्तक में राज्य की प्रमुख अनुसूचित जनजातियों, उनके ऐतिहासिक विकास, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन, रीति-रिवाजों, धार्मिक आस्थाओं, भाषाई एवं लोकसाहित्यिक परंपराओं, लोककला और पारंपरिक ज्ञान का व्यापक एवं व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक PDF डाउनलोड के रूप में उपलब्ध है और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा CGPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
छत्तीसगढ़ की पहचान केवल इसके घने वनों, खनिज संपदा या भौगोलिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है; इस राज्य की असली आत्मा यहाँ निवास करने वाले उन आदिम जनजातीय समुदायों में बसती है, जो सदियों से प्रकृति के साथ अद्भुत सामंजस्य स्थापित कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ’ नामक यह पुस्तक इसी समृद्ध, विविधतापूर्ण और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को अत्यंत सूक्ष्मता और प्रामाणिकता के साथ पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का एक गंभीर प्रयास है।
इस पुस्तक को व्यवस्थित रूप से दस भागों में विभाजित किया गया है, ताकि पाठक जनजातीय जीवन के हर पहलू को तार्किक और क्रमिक रूप से समझ सकें:
- भाग 1 और 2 में जनजातियों की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास और छत्तीसगढ़ की प्रमुख अनुसूचित जनजातियों का विस्तृत परिचयात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है।
- भाग 3 और 4 जनजातीय समाज के सामाजिक ताने-बाने (जैसे परिवार, गोत्र, विवाह और अनूठी युवागृह परंपरा) और उनके पारंपरिक व आधुनिक आर्थिक जीवन (कृषि, शिल्प और आजीविका) का गहन विश्लेषण करते हैं।
- भाग 5, 6 और 7 में छत्तीसगढ़ की जनजातियों की रंग-बिरंगी संस्कृति, लोककला, खान-पान, वेशभूषा, धर्म, आस्था (देवी-देवता एवं टोटमवाद) और उनके समृद्ध भाषाई व लोकसाहित्यिक संसार का जीवंत चित्रण किया गया है।
- भाग 8, 9 और 10 शासन, प्रशासन और विकास पर केंद्रित हैं। इसमें पेसा (PESA) अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम, पंचायती राज, जनजातीय विकास योजनाओं और विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) की जनसांख्यिकी का जिलावार व तुलनात्मक अध्ययन शामिल है, जो इसे प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जटिल मानवशास्त्रीय डेटा, जनसांख्यिकीय विश्लेषण और पारंपरिक ज्ञान को स्पष्ट और तुलनात्मक तालिकाओं (Comparative Tables) के माध्यम से सरल बनाया गया है।
यह पुस्तक न केवल अकादमिक शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और मानवविज्ञानियों के लिए एक उत्कृष्ट संदर्भ ग्रंथ है, बल्कि राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों के लिए भी एक प्रामाणिक और अनिवार्य मार्गदर्शिका है।
भाग–1 : परिचय
- छत्तीसगढ़ का परिचय
- जनजाति की अवधारणा
- जनजाति की परिभाषाएँ
- जनजातियों का वर्गीकरण
- भारत में अनुसूचित जनजातियों का विकास
- छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज का ऐतिहासिक विकास
भाग–2 : छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ
- छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियों की सूची
- छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ एवं उनके बारे में जानकारी
भाग–3 : जनजातियों का सामाजिक जीवन
- परिवार व्यवस्था (Family System)
- गोत्र एवं कुल व्यवस्था (Gotra and Clan System)
- विवाह प्रणाली (Marriage System)
- छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय विवाह पद्धतियाँ (Unique Marriage Systems)
- उत्तराधिकार व्यवस्था (Inheritance)
- सामाजिक संगठन (Social Organization)
- युवागृह: घोटुल एवं अन्य (Youth Dormitories)
भाग–4 : आर्थिक जीवन
- पारंपरिक आजीविका और अर्थव्यवस्था का वर्गीकरण
- कृषि एवं झूम (स्थानांतरित) खेती
- वनोपज एवं लघु वनोपज का संग्रहण
- पारंपरिक शिकार एवं मत्स्यपालन
- हस्तशिल्प एवं कुटीर उद्योग
- आधुनिक आर्थिक परिवर्तन एवं चुनौतियाँ
- छत्तीसगढ़ की जनजातियों की विशिष्ट पारंपरिक कला
भाग–5 : संस्कृति एवं परंपरा
- छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति: परंपरा, कला और जीवन-शैली का अद्भुत संगम
- लोककला
- लोकनृत्य
- लोकसंगीत
- लोककथाएँ
- वेशभूषा एवं आभूषण
- भोजन एवं पेय एवं पारंपरिक आवास
- छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय युवागृह
भाग–6 : धर्म एवं आस्था
- देवी-देवता एवं पर्व एवं त्योहार
- जनजातीय धर्म, पूजा-पद्धति और टोटम एवं प्रकृति पूजा
भाग–7 : भाषा एवं साहित्य
- छत्तीसगढ़ी जनजातीय भाषाओं का वर्गीकरण (Classification of Tribal Languages)
- गोंडी भाषा (Gondi Language): संपूर्ण विवरण
- हल्बी भाषा (Halbi Language): संपूर्ण विवरण
- कुरुख / कुड़ुख भाषा (Kurukh Language): संपूर्ण विवरण
- लोकसाहित्य
भाग–8 : प्रशासन एवं विकास
- अनुसूचित क्षेत्र
- पेसा अधिनियम
- वन अधिकार अधिनियम
- पंचायत व्यवस्था
- जनजातीय विकास योजनाएँ
- आश्रम विद्यालय एवं शिक्षा तथा स्वास्थ्य एवं पोषण
- छत्तीसगढ़ की जनजातियों का जनसांख्यिकीय, साक्षरता और सामाजिक-आर्थिक तुलनात्मक विश्लेषण (1991–2011)
भाग–9 : विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs)
- छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़े जनजातीय समूहों (PVTGs) का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रतिवेदन
भाग–10 : जिला अनुसार जनजातियाँ
